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चिंगम 1 क्या है? केरल के मलयालम नववर्ष का महत्व

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चिंगम 1 क्या है? केरल के मलयालम नववर्ष का महत्व

लेखक का दृष्टिकोण

कैलेंडर केवल दिनों और महीनों की गिनती नहीं होता। वह किसी क्षेत्र की ऋतुओं, कृषि, परंपराओं और सामाजिक जीवन की स्मृतियों को भी संजोए रखता है। केरल के लिए चिंगम 1 ऐसा ही एक दिन है जो समय की गणना को सांस्कृतिक जीवन से जोड़ता है।

संक्षिप्त उत्तर

चिंगम 1 मलयालम कैलेंडर के पहले महीने चिंगम का पहला दिन है और कोल्लवर्षम् (Kollavarsham) के नए वर्ष का आरंभ माना जाता है।

इसे व्यापक रूप से मलयालम नववर्ष कहा जाता है। हालांकि, केरल की परंपरा में विषु, जो अप्रैल में मेदम 1 को मनाया जाता है, भी नववर्ष और नए आरंभ से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। दोनों की अपनी अलग कैलेंडरी और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि है।

वृत्तांत

चिंगम 1 को समझने के लिए हमें एक हजार वर्ष से भी अधिक पीछे जाना होगा।

कोल्लवर्षम्, जिसे कोल्लम संवत् या Kollam Era भी कहा जाता है, का आरंभ सामान्यतः 825 ईस्वी के आसपास माना जाता है। हालांकि, इसकी उत्पत्ति को लेकर इतिहासकारों में पूर्ण सहमति नहीं है। कुछ ऐतिहासिक मत इसके आरंभ को कोल्लम नगर के विकास और राजनीतिक महत्व, वेणाड क्षेत्र के परिवर्तनों तथा उस समय प्रचलित स्थानीय कालगणना में हुए बदलावों से जोड़ते हैं।

इसलिए इसके पीछे किसी एक निश्चित कथा को स्थापित इतिहास मानने के बजाय अलग-अलग ऐतिहासिक मतों के रूप में देखना अधिक उचित है।

इस कैलेंडर का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह केरल में तिथियों और ऐतिहासिक घटनाओं को दर्ज करने की एक महत्वपूर्ण प्रणाली बन गया। इसका एक महत्वपूर्ण प्रमाण मम्पल्ली ताम्रपत्र (Mampalli Copper Plate) है, जिसकी तिथि कोल्लवर्षम् 149 अर्थात 974 ईस्वी की है। इसे कोल्लवर्षम् के प्रयोग का उपलब्ध सबसे प्रारंभिक अभिलेखीय प्रमाण माना जाता है।

मलयालम वर्ष का अंतिम महीना कर्किडकम होता है और उसके बाद चिंगम आता है। चिंगम का समय केरल के प्रसिद्ध ओणम उत्सव से भी जुड़ा हुआ है। परंपरागत रूप से यह समय कृषि, समृद्धि, पारिवारिक उत्सव और नए शुभ आरंभों से संबंधित रहा है।

इस प्रकार, चिंगम 1 केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं है। यह पुराने वर्ष से नए वर्ष की ओर संक्रमण और एक नए ऋतु-कृषि चक्र की शुरुआत का सांस्कृतिक प्रतीक भी है।

क्या आप जानते हैं?

  • चिंगम, कोल्लवर्षम् का पहला महीना है।
  • विषु और चिंगम 1, दोनों ही नए वर्ष और नए आरंभ की परंपराओं से जुड़े हैं, लेकिन उनकी कैलेंडरी और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि अलग है।
  • 974 ईस्वी के मम्पल्ली ताम्रपत्र में कोल्लवर्षम् की तिथि का महत्वपूर्ण प्रारंभिक प्रमाण मिलता है।

इसका महत्व

चिंगम 1 यह दिखाता है कि कैलेंडर किसी समाज की सांस्कृतिक पहचान को किस प्रकार संरक्षित कर सकते हैं। आज भी कोल्लवर्षम् केरल में त्योहारों, पारंपरिक अवसरों और कई सांस्कृतिक गतिविधियों की तिथियां निर्धारित करने में उपयोगी है।

यह हमें भारत की विविध कालगणना परंपराओं की भी याद दिलाता है। भारत में समय को समझने और मापने की एक ही पद्धति नहीं रही। अलग-अलग क्षेत्रों में कैलेंडर खगोल-विज्ञान, कृषि, ऋतुओं, राजनीति, व्यापार और स्थानीय परंपराओं से प्रभावित होकर विकसित हुए।

संदर्भ

  • मम्पल्ली ताम्रपत्र (974 ईस्वी): कोल्लवर्षम् के प्रारंभिक अभिलेखीय प्रमाणों में महत्वपूर्ण।
  • University of Calicut: Pre-Modern Kerala: Problems and Perspectives: मम्पल्ली ताम्रपत्र और केरल की ऐतिहासिक कालगणना के विकास पर चर्चा।
  • A. Sreedhara Menon: A Survey of Kerala History: केरल के इतिहास और कोल्लवर्षम् की पृष्ठभूमि को समझने के लिए महत्वपूर्ण आधुनिक ऐतिहासिक स्रोत।
  • M. G. S. Narayanan: Perumals of Kerala: Brahmin Oligarchy and Ritual Monarchy: प्रारंभिक मध्यकालीन केरल की राजनीतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि को समझने के लिए उपयोगी।

प्रश्नोत्तरी

1. चिंगम 1 मलयालम कैलेंडर में क्या दर्शाता है?

2. कोल्लवर्षम् के प्रयोग का प्रारंभिक प्रमाण किस अभिलेख से मिलता है?